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MAHENDERA SINGH

MAHENDERA SINGH
mahendera singh rathore

Wednesday, 5 December 2012

Jay maa Hinglaj

जैसलमेर से करीब 130 किमी दूर स्थि‍त माता तनोट राय (आवड़ माता) का मंदिर है। तनोट माता को देवी हिंगलाज माता का एक रूप माना जाता है। हिंगलाज माता शक्तिपीठ वर्तमान में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के लासवेला जिले में स्थित है।

भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने तनोट को अपनी राजधानी बनाया था। उन्होंने विक्रम संवत 828 में माता तनोट राय का मंदिर बनाकर मूर्ति को स्थापित किया था। भाटी राजवंशी और जैसलमेर के आसपास के इलाके के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी तनोट माता की अगाध श्रद्धा के साथ उपासना करते रह
े। कालांतर में भाटी राजपूतों ने अपनी राजधानी तनोट से हटाकर जैसलमेर ले गए परंतु मंदिर तनोट में ही रहा।

तनोट माता का य‍ह मंदिर यहाँ के स्थानीय निवासियों का एक पूज्यनीय स्थान हमेशा से रहा परंतु 1965 को भारत-पाक युद्ध के दौरान जो चमत्कार देवी ने दिखाए उसके बाद तो भारतीय सैनिकों और सीमा सुरक्षा बल के जवानों की श्रद्धा का विशेष केन्द्र बन गई।

सितम्बर 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हुआ। तनोट पर आक्रमण से पहले श‍त्रु (पाक) पूर्व में किशनगढ़ से 74 किमी दूर बुइली तक पश्चिम में साधेवाला से शाहगढ़ और उत्तर में अछरी टीबा से 6 किमी दूर तक कब्जा कर चुका था। तनोट तीन दिशाओं से घिरा हुआ था। यदि श‍‍त्रु तनोट पर कब्जा कर लेता तो वह रामगढ़ से लेकर शाहगढ़ तक के इलाके पर अपना दावा कर सकता था। अत: तनोट पर अधिकार जमाना दोनों सेनाओं के लिए महत्वपूर्ण बन गया था।
17 से 19 नवंबर 1965 को श‍त्रु ने तीन अलग-अलग दिशाओं से तनोट पर भारी आक्रमण किया। दुश्मन के तोपखाने जबर्दस्त आग उगलते रहे। तनोट की रक्षा के लिए मेजर जय सिंह की कमांड में 13 ग्रेनेडियर की एक कंपनी और सीमा सुरक्षा बल की दो कंपनियाँ दुश्मन की पूरी ब्रिगेड का सामना कर रही थी। शत्रु ने जैसलमेर से तनोट जाने वाले मार्ग को घंटाली देवी के मंदिर के समीप एंटी पर्सनल और एंटी टैंक माइन्स लगाकर सप्लाई चैन को काट दिया था।

दुश्मन ने तनोट माता के मंदिर के आसपास के क्षेत्र में करीब 3 हजार गोले बरसाएँ पंरतु अधिकांश गोले अपना लक्ष्य चूक गए। अकेले मंदिर को निशाना बनाकर करीब 450 गोले दागे गए परंतु चमत्कारी रूप से एक भी गोला अपने निशाने पर नहीं लगा और मंदिर परिसर में गिरे गोलों में से एक भी नहीं फटा और मंदिर को खरोंच तक नहीं आई।

सैनिकों ने यह मानकर कि माता अपने साथ है, कम संख्या में होने के बावजूद पूरे आत्मविश्वास के साथ दुश्मन के हमलों का करारा जवाब दिया और उसके सैकड़ों सैनिकों को मार गिराया। दुश्मन सेना भागने को मजबूर हो गई। कहते हैं सैनिकों को माता ने स्वप्न में आकर कहा था कि जब तक तुम मेरे मंदिर के परिसर में हो मैं तुम्हारी रक्षा करूँगी।

सैनिकों की तनोट की इस शानदार विजय को देश के तमाम अखबारों ने अपनी हेडलाइन बनाया।

एक बार फिर 4 दिसम्बर 1971 की रात को पंजाब रेजीमेंट की एक कंपनी और सीसुब की एक कंपनी ने माँ के आशीर्वाद से लोंगेवाला में विश्व की महानतम लड़ाइयों में से एक में पाकिस्तान की पूरी टैंक रेजीमेंट को धूल चटा दी थी। लोंगेवाला को पाकिस्तान टैंकों का कब्रिस्तान बना दिया था।

1965 के युद्ध के बाद सीमा सुरक्षा बल ने यहाँ अपनी चौकी स्थापित कर इस मंदिर की पूजा-अर्चना व व्यवस्था का कार्यभार संभाला तथा वर्तमान में मंदिर का प्रबंधन और संचालन सीसुब की एक ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। मंदिर में एक छोटा संग्रहालय भी है जहाँ पाकिस्तान सेना द्वारा मंदिर परिसर में गिराए गए वे बम रखे हैं जो नहीं फटे थे।
सीसुब पुराने मंदिर के स्थान पर अब एक भव्य मंदिर निर्माण करा रही है।

लोंगेवाला विजय के बाद माता तनोट राय के परिसर में एक विजय स्तंभ का निर्माण किया, जहाँ हर वर्ष 16 दिसम्बर को महान सैनिकों की याद में उत्सव मनाया जाता है।

हर वर्ष आश्विन और चै‍त्र नवरात्र में यहाँ विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। अपनी दिनोंदिन बढ़ती प्रसिद्धि के कारण तनोट एक पर्यटन स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध होता जा रहा है।

इतिहास: मंदिर के वर्तमान पुजारी सीसुब में हेड काँस्टेबल कमलेश्वर मिश्रा ने मंदिर के इतिहास के बारे में बताया कि बहुत पहले मामडि़या नाम के एक चारण थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्त करने की लालसा में उन्होंने हिंगलाज शक्तिपीठ की सात बार पैदल यात्रा की। एक बार माता ने स्वप्न में आकर उनकी इच्छा पूछी तो चारण ने कहा कि आप मेरे यहाँ जन्म लें।

माता कि कृपा से चारण के यहाँ 7 पुत्रियों और एक पुत्र ने जन्म लिया। उन्हीं सात पुत्रियों में से एक आवड़ ने विक्रम संवत 808 में चारण के यहाँ जन्म लिया और अपने चमत्कार दिखाना शुरू किया। सातों पुत्रियाँ देवीय चमत्कारों से युक्त थी। उन्होंने हूणों के आक्रमण से माड़ प्रदेश की रक्षा की।

काँस्टेबल कालिकांत सिन्हा जो तनोट चौकी पर पिछले चार साल से पदस्थ हैं कहते हैं कि माता बहुत शक्तिशाली है और मेरी हर मनोकामना पूर्ण करती है। हमारे सिर पर हमेशा माता की कृपा बनी रहती है। दुश्मन हमारा बाल भी बाँका नहीं कर सकता है।
माड़ प्रदेश में आवड़ माता की कृपा से भाटी राजपूतों का सुदृढ़ राज्य स्थापित हो गया। राजा तणुराव भाटी ने इस स्थान को अपनी राजधानी बनाया और आवड़ माता को स्वर्ण सिंहासन भेंट किया। विक्रम संवत 828 ईस्वी में आवड़ माता ने अपने भौतिक शरीर के रहते हुए यहाँ अपनी स्थापना की।

विक्रम संवत 999 में सातों बहनों ने तणुराव के पौत्र सिद्ध देवराज, भक्तों, ब्राह्मणों, चारणों, राजपूतों और माड़ प्रदेश के अन्य लोगों को बुलाकर कहा कि आप सभी लोग सुख शांति से आनंदपूर्वक अपना जीवन बिता रहे हैं अत: हमारे अवतार लेने का उद्देश्य पूर्ण हुआ। इतना कहकर सभी बहनों ने पश्चिम में हिंगलाज माता की ओर देखते हुए अदृश्य हो गईं। पहले माता की पूजा साकल दीपी ब्राह्मण किया करते थे। 1965 से माता की पूजा सीसुब द्वारा नियुक्त पुजारी करता है।...

Friday, 30 November 2012

Hansi joks chutkule

मंत्री जी और उनकी पत्नी कार में कहीं जा रहे थे। कार की खिड़कियां बद थी। मंत्री जी की पत्नी बोली, ''कार के भीतर बड़ी गर्मी है। क्यों न खिड़कियां खोल दी जाए।' मंत्री जी बोले, ''नहीं, इससे पब्लिक को पता चल जाएगा कि हमारा कार एयर कंडीशनर नहीं है।

कर्मचारी नेता जी के पास भागता हुआ आया-÷सर यमुना का पानी, खतरे से ऊपर आ गया है।'
''बेवकूफ, खतरे की पट्टी को, पानी से ऊपर लगाओ।' नेताजी ने आदेश वाले अंदाज में उत्तर दिया।

पत्रकार, ''नेताजी, एक बात बताइए, आप अपना वजन किसलिए बढ़ा रहे हैं?''
नेताजी, ''क्या है कि, कुछ दिनों बाद, लोग मुझे, सिक्कों में, तोलने वाले हैं।'

दो आदमी आपस में झगड़ रहे थे पहला आदमी बोला, ''मै एक हाथ से तेरे बत्तीस दाँत तोड़ दूंगा।''
दूसरा, ''मैं चौसठ दाँत दूंगा।''
एक तीसरा आदमी जो पास खड़ा उनकी बाते सुन रहा था हंसकर बोला, ''इसे मालूम ही नही कि, एक आदमी के बत्तीस से अधिक दाँत होते ही नहीं।''
दूसरा आदमी, ''मुझे मालूम था कि तुम बीच से जरूर बोलोगे इसलिए मैंने बत्तीस तुम्हारे भी गिन लिये थे।''

एक बार एक नेताजी की पत्नी अपने पति के अपोजिट चुनाव में खड़ी हुई। भाग्यवश वह जीत गई और उनका पति हार गया। प्रेस कान्फ्रेंस में पत्रकार ने उससे प्रश्न किया.... ''आपके मन में चुनाव लड़ने का विचार कैसे आया?'' वह बोली, ''घर में जब भी पति से मेरी लड़ाई होती थी हमेशा जीत मेरी ही होती थी। इससे ही मुझे चुनाव लड़ने की प्रेरणा मिली।''

दिनेश, ''इतनी तेजी से कहाँ जा रहे हो?''
रमेश, ''पुलिस स्टेशन! मेरे घर में चोर घुस आया है।''
दिनेश, ''बीबी को अकेला छोड़ दिया?''
रमेश, नहीं, ''उसने चोर को बांहो में जकड़ रखा है।''

नेताजी अपनी आंख विदेश से बनवाकर लौटे तो चमचों ने उन्हें घेर लिया। नेताजी अपनी विदेशी आंख पर गौरवान्वित होते हुए बोले ''कोई नहीं बता सकता कि मेरी कौन सी आंख असली है, कौन सी नकली।''
''मैें बता सकता हूं'' एक चमचा बोला।
''अच्छा तो बताओ,'' नेताजी ने कहा। ''आपकी बायीं आंख नकली है?, ''दायीं असली है,'' चमचा बोला।
''अरे तुम्हें कैसे पता चला,'' नेताजी हैरानी से बोले।
''बड़ी आसानी से सरकार! आपकी बायीं आंख में दयाभाव साफ दिखाई देता है, बस मैं समझ गया यही नकली आंख है।'' चमचे ने मुस्कुराते हुए कहा।

सुमित, ''हैलो अमित, तुम कितने बदल गए हो।''
अजनबी, ''क्षमा कीजिए मेरा नाम अमित नहीं।''
सुमित, ''अच्छा अब तुमने अपना नाम भी बदल लिया है।''

''आ जाओ कुत्ते से डरो नहीं।'' एक व्यक्ति ने घर आये मेहमान से कहा,
''क्यो क्या काटता नहीं?'' मेहमान ने पूछा।
''यह तो मैं भी देखना चाहता हूँ। क्योंकि इसे फिलहाल ही खरीदकर लाया हूँ।'

Sunday, 18 November 2012

mahndera siingh rathore

har kushi ko teri taraf mod du tere liye chand tare tod du khusiyo ke daravaje tere liye khol du etana kafi he ya do – char or judh bol du

mahendera singh rathore

kise ko Apna Banane Me Der Lagati he Ek Vada Nibhane Me Der Lagati he Magar Do Delo ka Pahela Milan Bhulane Me Sari Jindage Nikal Jati he

mahendera singh rathore

Ek Ladki Boli ; Mera jins 3000 ka he Mera tesat 2000 ka he Mere jute 1500 kahe Boy; aabe bas kar pahale cen banda kar 15 rs. ki ful vali chadde dikh raha he

mahendera singh rathore

shat chalne ke liye shat chahiye aasu rokne ke liye muskan chahiye jinda rahane liye jindage chahiye or jindage jine ke liye aap chahiye

mahendera singh rathore

khat likhata hu kunase shahi ka mat samajana aasek hu aapka kise or ka mat samjana